आगरा। विश्वप्रसिद्ध ताजमहल में मुगल सम्राट शाहजहां के 371वें उर्स के दूसरे दिन शुक्रवार को धार्मिक परंपराओं के अनुसार संदल की रस्म अदा की गई। इस अवसर पर शाहजहां और उनकी बेगम मुमताज महल की कब्रों पर संदल लगाया गया, जिससे पूरा माहौल खुशबू से सराबोर हो उठा। उर्स के दौरान तहखाने में स्थित असली कब्रों के दर्शन के लिए देश-विदेश से आए पर्यटकों और जायरीन की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आलम यह रहा कि प्रवेश पाने के लिए लोगों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

सुबह से ही ताजमहल के प्रवेश द्वारों पर पर्यटकों का तांता लगना शुरू हो गया था। दोपहर करीब दो बजे मुख्य मकबरे के तहखाने के द्वार खोले गए। शहंशाह शाहजहां उर्स सेलिब्रेशन कमेटी के अध्यक्ष सैयद इब्राहिम हुसैन जैदी ने कमेटी के सदस्यों के साथ मिलकर संदल की रस्म संपन्न कराई। दोनों कब्रों पर संदल और गुलपोशी के बाद फातिहा पढ़ी गई तथा देश-दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी गई।
शाम होते-होते उर्स का माहौल सूफियाना रंग में रंग गया। कव्वाली का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा, वहीं प्रवेश द्वार पर शहनाई की मधुर धुनों से मेहमानों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सीआईएसएफ के सीनियर कमांडेंट वैभव कुमार दुबे और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण सहायक प्रिंस वाजपेयी मौजूद रहे। शनिवार को उर्स का तीसरा और अंतिम दिन होगा। कमेटी के अनुसार सुबह करीब नौ बजे पहली चादर चढ़ाई जाएगी, जबकि दोपहर में 1720 मीटर लंबी हिंदुस्तानी सतरंगी चादर पेश की जाएगी। इसके साथ कुल शरीफ की रस्म अदा होगी। अंतिम दिन भी जायरीन और पर्यटकों के लिए ताजमहल में सुबह से शाम तक निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था रहेगी।
लंबी कतारों ने बढ़ाई परेशानी
उर्स के चलते ताजमहल के पश्चिमी गेट पर हालात काफी चुनौतीपूर्ण रहे। नीम तिराहा चौराहे से लेकर पैदल मार्ग तक करीब आधा किलोमीटर लंबी लाइनें लग गईं। दोपहर दो बजे से शाम चार बजे के बीच प्रवेश के लिए लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। भीड़ अधिक होने के कारण कई पर्यटक बिना दर्शन किए ही लौटने को मजबूर हो गए।


