यदि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की रूस के साथ युद्धविराम के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कथित 28 सूत्री शांति प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो इसके परिणाम केवल लड़ाई रुकने तक सीमित नहीं रहेंगे। अंतरराष्ट्रीय सामरिक विश्लेषणों के मुताबिक, इसका सबसे गहरा असर यूक्रेन की भौगोलिक अखंडता और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों पर पड़ सकता है। विश्वसनीय सामरिक संस्थानों के आकलन संकेत देते हैं कि ऐसे किसी समझौते के तहत यूक्रेन को अपने कुल क्षेत्रफल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गंवाना पड़ सकता है। यह नुकसान सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इससे यूक्रेन की समुद्री पहुंच, सैन्य स्थिति और राष्ट्रीय पहचान की दिशा भी बदल सकती है।
युद्धविराम का अर्थ: मोर्चों को फ्रीज करना
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) और इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के अनुसार, ट्रंप के प्रस्ताव की बुनियाद तत्काल युद्धविराम और मौजूदा सैन्य मोर्चों को यथास्थिति में स्थिर करने पर टिकी है। व्यवहार में इसका मतलब यह होगा कि जिन इलाकों पर इस समय रूसी सेना का नियंत्रण है, वे उसी के अधीन बने रहेंगे। सामरिक विशेषज्ञ इस मॉडल को “युद्धविराम के बदले क्षेत्रीय यथास्थिति” बताते हैं, जिसमें स्थायी राजनीतिक समाधान को भविष्य के लिए टाल दिया जाता है।
यूक्रेनी मीडिया की चेतावनी
यूक्रेन के मीडिया संस्थानों ने अब तक इस बात पर कोई साझा रिपोर्ट नहीं दी है कि ऐसे समझौते में देश को कितनी जमीन गंवानी पड़ेगी। हालांकि, प्रमुख मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने इसके जोखिमों को खुलकर रेखांकित किया है। प्रसिद्ध समाचार पोर्टल कीव इंडिपेंडेंट ने अपने विश्लेषणों में बार-बार चेताया है कि यदि मौजूदा फ्रंटलाइन को फ्रीज किया जाता है, तो इसका व्यावहारिक अर्थ क्रीमिया और पूर्वी-दक्षिणी यूक्रेनी क्षेत्रों पर रूसी नियंत्रण को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करना होगा।
युद्ध की मानवीय कीमत
युद्ध का सबसे भयावह पहलू उसकी मानवीय क्षति है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (UNOHCHR) के मुताबिक, अब तक 50,000 से अधिक नागरिकों की मौत और 1 लाख से ज्यादा लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि वास्तविक आंकड़े इससे कहीं अधिक माने जाते हैं। सैन्य नुकसान की बात करें तो ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय, ISW और IISS के अनुमान बताते हैं कि रूस के 1.5 लाख से अधिक सैनिक मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वहीं यूक्रेन की ओर 3 से 3.5 लाख सैनिकों के हताहत होने का अनुमान है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि दोनों देशों ने अभूतपूर्व मानवीय क्षति झेली है।
जेलेंस्की के सामने सीमित विकल्प
अंतरराष्ट्रीय सामरिक संस्थानों का मानना है कि राष्ट्रपति जेलेंस्की के लिए युद्धविराम पर विचार करना अब राजनीतिक से अधिक रणनीतिक मजबूरी बनता जा रहा है। IISS और सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के अनुसार, युद्ध निर्णायक जीत के बजाय लंबे एट्रिशन चरण में फंस चुका है। यूक्रेन को इस समय जनशक्ति की कमी, गोला-बारूद, वायु रक्षा और ऊर्जा अवसंरचना पर बढ़ते दबाव का सामना करना पड़ रहा है। पश्चिमी देशों से सैन्य सहायता की अनिश्चितता और देश के भीतर बढ़ती आर्थिक-सामाजिक थकान ने हालात को और जटिल बना दिया है। विश्लेषकों का निष्कर्ष है कि भले ही युद्धविराम कठिन और अलोकप्रिय शर्तों के साथ आए, लेकिन यह यूक्रेन के लिए समय खरीदने, अपनी क्षमताएं बचाने और भविष्य की कूटनीतिक व सैन्य रणनीति तैयार करने का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता बनता दिख रहा है। दूसरी ओर, कठोर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते रूस की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा दबाव बना हुआ है।


