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जालौन हत्याकांड: थाना प्रभारी की मौत में महिला सिपाही गिरफ्तार, शादी के खर्च पर था विवाद

25 लाख की डिमांड और धमकी ने बढ़ाया तनाव, कॉल रिकॉर्ड ने खोले कई राज

जालौन जिले के कुठौंंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपी महिला कांस्टेबल मीनाक्षी शर्मा को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। जांच में सामने आया है कि दोनों के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे और शादी के खर्च को लेकर तनाव चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक मीनाक्षी फरवरी 2026 में शादी करने वाली थी और कथित रूप से उसने इंस्पेक्टर पर शादी के लिए करीब 25 लाख रुपये खर्च करने का दबाव बनाया था। बताया जा रहा है कि वह लगातार धमकी दे रही थी कि यदि पैसे नहीं मिले तो वह निजी वीडियो उनकी पत्नी को भेज देगी। इसी को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ता चला गया था और इंस्पेक्टर मानसिक रूप से परेशान रहने लगे थे।

मच्छरदानी में मिला शव, सीने पर पिस्टल रखी थी

शुक्रवार देर रात थाना परिसर स्थित सरकारी आवास में अरुण कुमार राय का शव खून से लथपथ हालत में मच्छरदानी के भीतर मिला था। पिस्टल उनके सीने पर रखी थी, जिससे गोली चली होने की बात सामने आई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

पत्नी ने की निष्पक्ष जांच की मांग

मृतक की पत्नी माया राय ने मुख्यमंत्री से इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि साजिश के सभी पहलुओं को उजागर किया जाए, ताकि उनके पति को न्याय मिल सके।

चैट और कॉल डिटेल से खुले राज

पुलिस द्वारा आरोपी महिला सिपाही के मोबाइल फोन की जांच के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं। बताया गया कि उसके पास तीन मोबाइल फोन और चार सिम कार्ड थे, जबकि इंस्पेक्टर के पास भी तीन सिम का इस्तेमाल होने के प्रमाण मिले हैं। कॉल लॉग और चैट रिकॉर्ड खंगालने पर कई ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनसे उसकी बातचीत पुलिस अधिकारियों तक को चौंकाने वाली लगी। इसकी भनक लगते ही विभाग में हलचल मच गई है।

पूछताछ में नहीं किया सहयोग

हिरासत में पूछताछ के दौरान मीनाक्षी शर्मा ने पुलिस के सवालों के सीधे जवाब नहीं दिए। उसने दावा किया कि वह जब कमरे में पहुंची तो इंस्पेक्टर घायल अवस्था में पड़े थे, घबराकर वह थाना परिसर की ओर दौड़ गई। हालांकि पुलिस को उसकी कहानी पर भरोसा नहीं हो रहा है।

ड्यूटी से भी गायब थी सिपाही

जांच में यह भी सामने आया है कि मीनाक्षी पिछले करीब 10 दिनों से ड्यूटी पर मौजूद नहीं थी। इसके पीछे के कारणों की भी पड़ताल की जा रही है।

पुराने संबंधों का इतिहास

मिली जानकारी के अनुसार, मीनाक्षी की तैनाती मार्च 2024 में कोंच कोतवाली में हुई थी। कुछ महीनों बाद अरुण कुमार राय को वहीं प्रभारी निरीक्षक बनाया गया था। दोनों करीब सात महीने तक एक ही थाने में साथ तैनात रहे और इसी दौरान उनकी नजदीकियां बढ़ीं।

फरवरी 2025 में अरुण का तबादला उरई हुआ और अप्रैल में मीनाक्षी को यूपी-112 यूनिट भेज दिया गया। इसके बावजूद वह कोंच स्थित सरकारी आवास में रहकर आती-जाती रही। अरुण के स्थानांतरण के बाद उनका व्यवहार बदल गया था और विवाद की घटनाएं बढ़ने लगी थीं।

बढ़ता तनाव बना मौत की वजह?

करीबी लोगों का कहना है कि लगातार झगड़े, दबाव और निजी विवाद के चलते इंस्पेक्टर मानसिक तनाव में थे। यही तनाव अंत में उनकी मौत की वजह बना, ऐसा पुलिस कयास लगा रही है।

जांच के लिए बनी एसआईटी

पुलिस अधीक्षक ने घटना की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। टीम सबूतों और कॉल रिकॉर्ड समेत सभी पहलुओं की जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपेगी।

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