छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रायपुर जोनल ऑफिस ने 19 दिसंबर 2025 को IAS अधिकारी निरंजन दास को मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। गिरफ्तारी के बाद ED ने निरंजन दास को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें तीन दिन की ED रिमांड पर भेज दिया।

जांच की शुरुआत कैसे हुई?
ED ने इस मामले में जांच तब शुरू की थी, जब ACB/EOW, रायपुर ने शराब घोटाले से जुड़ी एफआईआर दर्ज की। यह एफआईआर IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी। पुलिस और ED की संयुक्त जांच में सामने आया कि इस घोटाले से राज्य सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ और लगभग 2500 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई।
ED का दावा: IAS को मिले 18 करोड़ रुपये
ED के अनुसार, जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि IAS अधिकारी निरंजन दास को शराब घोटाले से सीधे तौर पर करीब 18 करोड़ रुपये की अवैध राशि प्राप्त हुई। एजेंसी के पास डिजिटल रिकॉर्ड, जब्त दस्तावेज और गवाहों के बयान मौजूद हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे शराब सिंडिकेट के सक्रिय हिस्सेदार थे।
क्या थी निरंजन दास की भूमिका?
जांच एजेंसी का आरोप है कि निरंजन दास को जानबूझकर आबकारी आयुक्त और आबकारी विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, ताकि पूरे घोटाले को प्रशासनिक संरक्षण मिल सके।
ED का कहना है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए:
- वैधानिक जिम्मेदारियों की अनदेखी की
- अवैध शराब कारोबार को बढ़ावा दिया
- सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया
इसके बदले उन्हें हर महीने लगभग 50 लाख रुपये की रिश्वत दी जाती थी।
फील्ड अधिकारियों को दिए जाते थे निर्देश
ED की जांच में यह भी सामने आया है कि निरंजन दास फील्ड स्तर के अधिकारियों को निर्देश देते थे कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में बिना हिसाब की कच्ची और अवैध शराब की बिक्री को बढ़ावा दें। इससे न सिर्फ मूल अपराध को अंजाम मिला, बल्कि अवैध कमाई को छिपाने और खपाने यानी मनी लॉन्ड्रिंग में भी उनकी अहम भूमिका रही।


