भारत ने कृषि क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए चावल उत्पादन के मामले में अपने पड़ोसी चीन को पीछे छोड़ दिया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जानकारी दी कि देश का कुल चावल उत्पादन बढ़कर 15.18 करोड़ टन तक पहुंच गया है, जबकि चीन का उत्पादन 14.5 करोड़ टन रहा। उन्होंने इसे भारत की कृषि शक्ति और किसानों की मेहनत का प्रत्यक्ष प्रमाण बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि देश को खाद्य सुरक्षा के लिहाज से और अधिक मजबूत बनाती है।
भारत अब सिर्फ आत्मनिर्भर नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य प्रदाता
कृषि मंत्री के अनुसार, भारत अब केवल घरेलू जरूरतें पूरी करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चावल की आपूर्ति कर रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल रही है। भारत का यह बदलाव—भोजन की कमी वाले देश से वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता बनने तक—कृषि नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
किसानों के लिए बड़ी सौगात: 25 फसलों की 184 नई किस्में जारी
एक विशेष कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) द्वारा विकसित 25 फसलों की 184 उन्नत किस्मों का लोकार्पण किया गया।
इन किस्मों की खासियत है:
- अधिक पैदावार
- बेहतर गुणवत्ता
- जलवायु के अनुकूल बीज
- किसानों की आय बढ़ाने की क्षमता
- मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ये किस्में जल्द से जल्द किसानों तक पहुंचाई जाएं।
कृषि क्रांति के नए दौर में भारत
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उच्च उपज देने वाले और जलवायु-अनुकूल बीजों के विकास से देश एक नई कृषि क्रांति के चरण में प्रवेश कर चुका है। यह बदलाव खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बना रहा है।
मोदी सरकार में रिकॉर्ड संख्या में फसल किस्मों को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब तक 3,236 नई फसल किस्मों को मंजूरी दी जा चुकी है।
जबकि 1969 से 2014 के बीच केवल 3,969 किस्में ही अधिसूचित हुई थीं।
अब तक कुल 7,205 फसल किस्में अधिसूचित की जा चुकी हैं, जिनमें चावल, गेहूं, मक्का, ज्वार, दालें, तिलहन और फाइबर फसलें शामिल हैं।


