9.1 C
Agra
Homeदेशगैर-निर्धारित जगहों पर कुत्तों को खाना देने से रोकना अपराध नहीं: बॉम्बे...

गैर-निर्धारित जगहों पर कुत्तों को खाना देने से रोकना अपराध नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

आवारा कुत्तों को खाना खिलाने को लेकर हाउसिंग सोसायटियों में होने वाले विवादों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम और स्पष्ट फैसला दिया है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि कोई व्यक्ति गैर-निर्धारित स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना देने से किसी को रोकता है, तो इसे न तो अवैध कहा जा सकता है और न ही यह आपराधिक कृत्य है। न्यायमूर्ति मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति संदेश पाटिल की पीठ ने पुणे निवासी 42 वर्षीय व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे को रद्द कर दिया। उस व्यक्ति पर आरोप था कि उसने एक महिला और उसके साथ मौजूद लोगों को अपनी सोसायटी के गेट पर कुत्तों को खाना देने से रोका और कथित रूप से उन्हें बाहर निकलने से भी बाधित किया। अदालत ने कहा कि ऐसे हालात में यह आचरण भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध की श्रेणी में नहीं आता।

सार्वजनिक स्थानों पर रोक कानूनन गलत नहीं

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि फुटपाथ, सोसायटी के प्रवेश और निकास द्वार, स्कूल बस स्टॉप जैसे संवेदनशील स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना देने से रोकना “गलत तरीके से रोकना” नहीं माना जा सकता। यदि कोई व्यक्ति ऐसे गैर-निर्धारित स्थान पर भोजन करा रहा है और उसे रोका जाता है, तो यह कानून का उल्लंघन नहीं है।

बच्चों और निवासियों की सुरक्षा प्राथमिक

अदालत ने माना कि आरोपी का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं था, बल्कि सोसायटी में रहने वाले बच्चों और अन्य निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। रिकॉर्ड से यह भी सामने आया कि उस सोसायटी में पहले कुत्तों के काटने और हमले की घटनाएं हो चुकी थीं। ऐसे में बच्चों की आवाजाही वाले इलाकों में कुत्तों को खाना देने से रोकना उचित और वैध है।

सुप्रीम कोर्ट और नियमों का संदर्भ

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के पूर्व निर्णयों और एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने कहा कि नियमों के तहत आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग एरिया तय किए गए हैं और भोजन वहीं दिया जाना चाहिए। आरोपी द्वारा केवल यह बताना कि वह स्थान निर्धारित फीडिंग स्पॉट नहीं है, किसी भी तरह से अपराध नहीं माना जा सकता। हिंजेवाड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, जब शिकायतकर्ता कुत्तों को खाना देने पहुंची थीं, तो सोसायटी के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई थी। आरोपी ने अदालत को बताया कि परिसर में 40 से अधिक आवारा कुत्ते हैं, जिससे निवासियों को लगातार परेशानी हो रही है। इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि गैर-निर्धारित स्थानों पर कुत्तों को खाना देने से रोकना पूरी तरह कानूनी है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments