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खुले नाले बने जान के दुश्मन, एक मौत ने खोली सिस्टम की पोल

आबूलेन में शुक्रवार को ई-रिक्शा चालक सनी की मौत ने शहर की लापरवाह व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर दी है। यह हादसा केवल एक व्यक्ति की जान जाने का मामला नहीं, बल्कि उन खुले और असुरक्षित नालों का नतीजा है, जो पूरे शहर में खतरे के रूप में मौजूद हैं। घटना के बाद जब अमर उजाला की टीम ने शहर के प्रमुख नालों का जायजा लिया, तो हालात बेहद डरावने नजर आए। जगह-जगह खुले नाले, टूटी दीवारें, गायब रेलिंग और अंधेरे में डूबे रास्ते—सब मिलकर हादसों को खुला न्योता दे रहे हैं।

आबूलेन नाला: अंधेरे में छुपा मौत का जाल

जिस आबूलेन नाले में सनी की जान गई, वहां सुरक्षा इंतजाम नाम मात्र के भी नहीं हैं। नाले की दीवारें कई स्थानों से टूट चुकी हैं। न रेलिंग है, न चेतावनी बोर्ड और न ही रोशनी की कोई व्यवस्था। रात के समय यह इलाका पूरी तरह अंधेरे में डूब जाता है, जिससे सड़क और नाले का फर्क तक नजर नहीं आता। यही लापरवाही सनी के लिए जानलेवा साबित हुई।

ओडियन नाला: एक कदम और जिंदगी खत्म

ओडियन नाले की स्थिति और भी भयावह है। नाला सड़क से इस कदर सटा हुआ है कि जरा सी चूक किसी की भी जान ले सकती है। बरसात में हालात और खराब हो जाते हैं, जब सड़क और नाले की पहचान ही मिट जाती है। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यहां आए दिन लोग फिसलकर गिरते हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।

दिल्ली रोड: पुराने हादसे, वही हालात

दिल्ली रोड पर हालात सिस्टम की संवेदनहीनता की मिसाल हैं। यह वही क्षेत्र है जहां पहले भी नाले में गिरकर बच्चों की जान जा चुकी है। बावजूद इसके, आज भी नालों पर रखे स्लैब टूटे हुए हैं और रास्ते असुरक्षित बने हुए हैं। बुजुर्गों और बच्चों के लिए यहां पैदल चलना किसी जोखिम से कम नहीं।

हादसे के बाद हरकत में आता है प्रशासन

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम हर बार हादसे के बाद ही जागता है। निरीक्षण, बयान और आश्वासन जरूर मिलते हैं, लेकिन कुछ दिनों में सब कुछ फिर पहले जैसा हो जाता है। नालों की मरम्मत, ढक्कन और रेलिंग जैसी बुनियादी जरूरतें लगातार नजरअंदाज की जा रही हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।

अधिकारी बोले: कराए जाएंगे सुरक्षा कार्य

नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अमर सिंह ने बताया कि नालों की सफाई के दौरान क्षतिग्रस्त दीवारों की पहचान की गई है। जहां सुरक्षा दीवार या रेलिंग नहीं है, वहां आवश्यक कार्य कराए जाएंगे और निर्माण विभाग को भी निर्देश दिए जा चुके हैं।

क्या है पूरा मामला

शुक्रवार शाम मेरठ के कैंट क्षेत्र में आबूलेन स्थित काठ के पुल के पास बड़ा हादसा हुआ। नाले पर बाउंड्री न होने के कारण एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर सीधे नाले में गिर गया। ई-रिक्शा के नीचे दबने और गंदे पानी में डूबने से चालक सनी (42), निवासी रजबन, की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

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