उन्नाव रेप मामला: सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, जमानत पर रोक

उन्नाव रेप मामले में आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर तत्काल रोक लगा दी है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की।
सीबीआई ने अपनाया सख्त रुख
सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने कड़ी दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि यह एक नाबालिग बच्ची के साथ किया गया जघन्य अपराध है, जिसने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया था। सीबीआई ने तर्क दिया कि ऐसे गंभीर मामलों में राहत देना गलत मिसाल कायम करेगा और इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। पीठ ने कहा कि इस केस में कानून से जुड़े कई अहम सवाल हैं, जिन पर विस्तार से विचार किया जाना जरूरी है। कोर्ट ने संबंधित पक्षों को 14 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
जमानत के खिलाफ पीड़िता का विरोध
इससे पहले शनिवार को रेप पीड़िता दिल्ली स्थित सीबीआई कार्यालय पहुंची थी, जहां उसने कुलदीप सेंगर की जमानत के खिलाफ औपचारिक आवेदन दिया। गौरतलब है कि 23 दिसंबर को दिल्ली हाई कोर्ट ने सेंगर को सशर्त जमानत दी थी, जिसके बाद से ही विरोध तेज हो गया।
धरने पर बैठी पीड़िता और समर्थक
जमानत के फैसले के बाद से पीड़िता, उसकी मां और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना लगातार धरना दे रही हैं। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं और सभी की मांग है कि सुप्रीम कोर्ट आरोपी की जमानत को रद्द करे।
कई याचिकाओं पर होगी सुनवाई
सीबीआई की याचिका के अलावा, सुप्रीम कोर्ट में दो अन्य याचिकाएं भी दायर की गई हैं। इन याचिकाओं के जरिए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ इस पूरे मामले पर सुनवाई करेगी।
हाई कोर्ट ने क्यों दी थी राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर को यह कहते हुए कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया था कि वह पहले ही करीब सात साल पांच महीने जेल में बिता चुका है। इसी फैसले के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया।


