नुक (ग्रीनलैंड): आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कनाडा और फ्रांस ने ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में अपने-अपने कांसुलेट खोलकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के प्रति समर्थन का स्पष्ट संदेश दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है, जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ग्रीनलैंड को लेकर बार-बार “अधिग्रहण” जैसी बयानबाजी कर चुके हैं।
कनाडा की विदेश मंत्री Anita Anand ने नुक में कनाडाई कांसुलेट का उद्घाटन किया। समारोह के दौरान ‘मैपल लीफ’ झंडा फहराया गया और राष्ट्रगान गाया गया। आनंद ने कहा कि यह पहल ग्रीनलैंड और डेनमार्क के साथ कनाडा की साझेदारी को और मजबूत करेगी, खासकर आर्कटिक सुरक्षा, व्यापार और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कनाडा ने ग्रीनलैंड में कांसुलेट खोलने का फैसला पहले ही कर लिया था, लेकिन मौसम संबंधी कारणों से उद्घाटन में देरी हुई।
फ्रांस की ओर से ज्यां-नोएल पोइरियर ने महावाणिज्य दूत के रूप में कार्यभार संभाला। इसके साथ ही फ्रांस ग्रीनलैंड में स्थायी महावाणिज्य दूतावास स्थापित करने वाला यूरोपीय संघ का पहला देश बन गया है। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय जून 2025 में राष्ट्रपति Emmanuel Macron की ग्रीनलैंड यात्रा के दौरान लिया गया था, जहां उन्होंने यूरोप की एकजुटता पर जोर दिया था।
हाल के महीनों में ट्रंप ने डेनमार्क और कई यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी दी थी और ग्रीनलैंड को लेकर कठोर बयान दिए थे। हालांकि, यूरोपीय संघ की सामूहिक प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने अपने टैरिफ प्रस्ताव को वापस ले लिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि कनाडा और फ्रांस के ये कदम केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भी हैं। आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती सक्रियता के बीच पश्चिमी देशों की यह पहल क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।


