एक के बाद एक हुई मौतों ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। पहले छोटे भाई संदीप का साया सिर से उठा और अब दो सगे बेटों व दो भतीजों की मौत ने पिता प्रदीप सोनकर की दुनिया ही उजाड़ दी। प्रतीक और प्रिंस की असमय मौत के बाद घर में कोहराम मचा है। चार चिराग एक साथ बुझने से दो सगे भाइयों के घर अंधेरे में डूब गए। पिता प्रदीप सोनकर ने बताया कि उनके तीन बच्चे थे—प्रतीक, प्रिंस और सबसे छोटी बेटी प्राची। बेटों की मौत ने परिवार की खुशियां छीन लीं। वहीं, दो साल पहले बीमारी से छोटे भाई संदीप की मौत हो चुकी थी। संदीप की पत्नी सीमा अपने बेटे प्रियांशु और दो बेटियों छाया व गुल्ली के साथ रह रही थी। अब प्रियांशु की भी मौत हो जाने से उसका घर भी सूना हो गया।
“किसकी बुरी नजर लग गई हमारे परिवार को”
संदीप की पत्नी सीमा बार-बार यही कहती रही कि न जाने उनके परिवार को किसकी नजर लग गई। प्रदीप के बड़े भाई राजेश सोनकर ने बताया कि उनके चार बेटे—शुभम, शिवम, सत्यम और करन—और एक बेटी पूनम है। करन सबसे छोटा और बेहद जिम्मेदार था। वह 11वीं की पढ़ाई के साथ-साथ घर की जिम्मेदारियां भी संभाल रहा था। करन की मौत के बाद से राजेश की पत्नी शीला और बेटी पूनम बदहवास हैं।
तालाब नहीं, गड्ढा बना मौत की वजह
ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान पर बच्चों के शव मिले, वह कोई तालाब नहीं बल्कि एक जमींदार की भूमिधरी भूमि है। करीब दो साल पहले यहां से मिट्टी निकाली गई थी, जिससे लगभग 14 से 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया। बारिश के दौरान उसमें पानी भर गया और वह तालाब जैसा दिखने लगा। इसी गड्ढे ने चार बच्चों की जान ले ली। घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और मिट्टी निकासी के मामले में संबंधित लेखपाल से जवाब मांगा गया है।
गांव में पसरा मातम, चूल्हे तक नहीं जले
चचेरे भाइयों की मौत की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। महिलाएं और ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल पर पहुंचे। चार मासूमों की एक साथ मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया। हालात ऐसे थे कि कई घरों में उस दिन चूल्हे तक नहीं जले।
पिता ने जताई हत्या की आशंका
प्रतीक और प्रिंस के पिता प्रदीप सोनकर ने घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि तालाब के पास मिले उनके बेटों के कपड़े सूखे थे। अगर बच्चे डूबे होते तो रात की ओस से कपड़े भीग जाते। उन्होंने आशंका जताई कि बच्चों की हत्या कर शव पानी में फेंके गए हैं और पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की। घटना से नाराज ग्रामीणों ने पुलिस चौकी का घेराव और सड़क जाम की योजना बनाई, लेकिन समय रहते पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।


