उद्योग और व्यापार पर अतिरिक्त बोझ नहीं, जिला पंचायत का बड़ा फैसला

आगरा जिला पंचायत क्षेत्र में फिलहाल उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को किसी भी प्रकार का लाइसेंस शुल्क नहीं देना होगा। सोमवार को हुई जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में नए लाइसेंस शुल्क से जुड़ा प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. मंजू भदौरिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में उद्यमियों पर किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने का कोई इरादा नहीं है।
बोर्ड बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 59 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1997 से पंचायत क्षेत्र में दुकानों से व्यावसायिक शुल्क वसूला जा रहा था, जिसकी राशि 50 रुपये से लेकर 500 रुपये तक थी। वर्ष 2018 में शासन द्वारा नए व्यावसायिक शुल्क नियम बनाए गए थे, जिन्हें सभी जिला पंचायत क्षेत्रों में लागू किया जाना था। हालांकि, पिछले सात वर्षों से नए मॉडल बायलॉज को लागू करने की प्रक्रिया चल रही थी।
सोमवार की बैठक में नए शुल्क ढांचे को पेश किया जाना प्रस्तावित था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नए नियम लागू होने पर उद्योगों को सालाना एक लाख रुपये तक लाइसेंस शुल्क देना पड़ सकता था। इस प्रस्ताव का लघु उद्योग भारती और नेशनल चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ने कड़ा विरोध किया। संगठनों ने मुख्यमंत्री, पंचायत राज मंत्री और जिला पंचायत अध्यक्ष को पत्र भेजकर आपत्ति दर्ज कराई थी।
विरोध को देखते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष ने लाइसेंस शुल्क के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया। चैंबर अध्यक्ष संजय गोयल ने जिला पंचायत के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के चलते पहले ही नए उद्योग प्रभावित हैं, ऐसे में अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं होता।


