ईरान में सरकार विरोधी आंदोलनों को दबाने के लिए अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन पर कठोर दमन के आरोप लग रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों में शामिल सैकड़ों लोगों को फांसी की सजा दिए जाने की आशंका जताई जा रही है, जबकि हजारों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। इसी बीच अमेरिका की ओर से एक बड़ा दावा सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का कहना है कि ईरान में प्रस्तावित 800 फांसी की सजाओं पर फिलहाल रोक लग गई है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी टीम ने ईरानी नेतृत्व को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हत्याएं जारी रहीं तो इसके गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। उनके मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप को यह जानकारी मिली है कि अगले दिन होने वाली 800 फांसी की सजाओं को टाल दिया गया है।
क्या टला अमेरिका का सैन्य कदम?
लेविट ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति और उनकी टीम हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सभी विकल्प खुले हुए हैं। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र के चार देशों की कूटनीतिक कोशिशों के बाद अमेरिका ने फिलहाल तेहरान पर सैन्य कार्रवाई न करने का फैसला किया है। ईरान द्वारा अपना हवाई क्षेत्र फिर से खोलने के बाद इस बात को और बल मिला है कि तत्काल किसी हमले की आशंका टल गई है।
अमेरिका–ईरान के बीच बातचीत में किसकी भूमिका?
सूत्रों के मुताबिक सऊदी अरब, कतर, ओमान और मिस्र ने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद का रास्ता खोलने में अहम भूमिका निभाई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 48 घंटे तक चली कूटनीतिक कोशिशों के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर संभावित हमले को फिलहाल टालने का निर्णय लिया। इससे पहले ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि ईरान में हिंसा की घटनाओं में कुछ कमी देखी गई है।


