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ईडी ने जयपी इंफ्राटेक के पूर्व सीएमडी मनोज गौर के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

जयपी इंफ्राटेक मामला: मनोज गौर के खिलाफ ईडी ने कोर्ट में चार्जशीट पेश की

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मनोज गौर के खिलाफ पटियाला हाउस कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया। यह चार्जशीट प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में प्रस्तुत की गई है, जिसे मंगलवार को किसी न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। इसी दौरान, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) ने मनोज गौर से जुड़े मुख्य मामले और उनकी जमानत याचिका पर ईडी की दलीलों और जवाब के लिए अगली सुनवाई की तारीख 17 जनवरी निर्धारित की है।

ईडी का कहना है कि यह मामला करीब 13,883 करोड़ रुपये की कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। मनोज गौर ने नियमित जमानत के लिए अदालत का रुख किया है। उन्हें वर्ष 2018 में दर्ज ईडी के एक मामले में 13 नवंबर, 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वे 18 नवंबर, 2025 से न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी ओर से जमानत याचिका अधिवक्ता फर्रुख खान के माध्यम से दाखिल की गई है।

याचिका में तर्क दिया गया है कि 61 वर्षीय मनोज गौर बीते तीन दशकों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि मामला आठ वर्ष पुराना है, आरोप मुख्य रूप से दस्तावेजों पर आधारित हैं और गौर को किसी प्रकार का व्यक्तिगत लाभ नहीं हुआ। साथ ही, कंपनियों से उनका वैधानिक रूप से नियंत्रण समाप्त हो चुका है। इन परिस्थितियों में हिरासत को अनुचित बताते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन करार दिया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब जांच की कोई ठोस आवश्यकता नहीं है, तब आरोपी को जेल में रखना दोष सिद्ध होने से पहले सजा देने जैसा है। इसमें इस सिद्धांत पर जोर दिया गया है कि जमानत सामान्य नियम है और कारावास अपवाद, विशेषकर ऐसे मामलों में जहां जांच और मुकदमे की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। इसके अलावा, यह दलील दी गई है कि मनोज गौर की समाज में मजबूत पकड़ है और उनके पारिवारिक, सामाजिक और व्यावसायिक संबंध न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में स्थापित हैं। वहीं, ईडी का आरोप है कि यह मामला गृह खरीदारों से जुटाई गई राशि के दुरुपयोग से जुड़ा है। एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने लगभग 13,000 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन उस धन का इस्तेमाल घर खरीदारों को आवास उपलब्ध कराने के लिए नहीं किया गया।

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