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इजरायल ने कनाडाई सांसदों को वेस्ट बैंक में एंट्री से रोका, ओटावा ने जताया विरोध

आतंकवाद के आरोपों के बीच इजरायल ने कनाडाई प्रतिनिधिमंडल की एंट्री रोकी

इजरायल ने एक कनाडाई प्रतिनिधिमंडल को कब्जे वाले वेस्ट बैंक में जाने से रोक दिया है, जिसमें कनाडा की संसद के छह सदस्य शामिल थे। इजरायल स्थित कनाडाई दूतावास के अनुसार, इस समूह के कुछ सदस्यों के संबंध इस्लामिक रिलीफ वर्ल्डवाइड से बताए गए, जिसे इजरायल आतंकवादी संगठन मानता है। इस कदम पर कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और कहा कि कनाडा ने इस व्यवहार को लेकर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है।
सीमा पर सांसद के साथ धक्का-मुक्की का आरोप
ओंटारियो से लिबरल पार्टी की सांसद इकरा खालिद ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने के दौरान इजरायली सीमा अधिकारियों ने उन्हें कई बार धक्का दिया। उनके मुताबिक, जॉर्डन से एलनबी क्रॉसिंग के जरिए वेस्ट बैंक में प्रवेश के बाद समूह के एक सदस्य को अतिरिक्त पूछताछ के लिए अलग ले जाया गया था। उसी दौरान जब वह स्थिति समझने की कोशिश कर रही थीं, तब उनके साथ यह व्यवहार हुआ। खालिद ने कहा कि अधिकारियों को पता था कि वह सांसद हैं, क्योंकि उनके पास विशेष कनाडाई पासपोर्ट था।
इजरायल का पक्ष
इजरायली दूतावास ने अपने बयान में कहा कि देश उन व्यक्तियों या संगठनों को प्रवेश की अनुमति नहीं देता, जिनके संबंध आतंकवादी संस्थाओं से हों। बयान में यह भी कहा गया कि ‘द कनाडाई-मुस्लिम वोट’ नामक समूह को इस्लामिक रिलीफ कनाडा से फंडिंग मिलती है, जो इस्लामिक रिलीफ वर्ल्डवाइड से जुड़ा है—और इसी आधार पर प्रवेश रोका गया।
पारदर्शिता पर सवाल
यह प्रतिनिधिमंडल वेस्ट बैंक में विस्थापित फिलिस्तीनियों से मिलने की योजना पर था। हाल ही में इजरायली सरकार ने वहां यहूदी बस्तियों में 764 नए घरों के निर्माण को मंजूरी दी है। ओटावा में नेशनल काउंसिल ऑफ कनाडाई मुस्लिम्स ने इस घटनाक्रम को इजरायली सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाने वाला बताया।
कनाडा की बदली नीति का संदर्भ
ब्रिटिश कोलंबिया से न्यू डेमोक्रेट सांसद जेनी क्वान ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों के पास वैध इलेक्ट्रॉनिक ट्रैवल ऑथराइजेशन थे, जिन्हें यात्रा के दिन ही रद्द कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि सितंबर में कनाडा ने कई अन्य देशों के साथ मिलकर फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दी थी—जो उसकी विदेश नीति में एक अहम बदलाव माना गया, और जिसे शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बताया गया था।

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