इंदौर के पलासिया रिंग रोड इलाके में हुई लूट की वारदात ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। मामले में शामिल पाए गए दो पुलिसकर्मियों को विभागीय जांच के बाद सेवा से बाहर कर दिया गया है। इस कठोर कार्रवाई से यह स्पष्ट संदेश गया है कि कानून तोड़ने वालों के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हों।
डीसीपी जोन-2 कुमार प्रतीक ने जानकारी देते हुए बताया कि एमआईजी थाना में पदस्थ आरक्षक अविनाश चंद्रवंशी और मनोज मालवीय को शुक्रवार को बर्खास्त कर दिया गया। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपने दो साथियों सोहेल और नावेद के साथ मिलकर एक व्यापारी से लूटपाट की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया।
व्यापारी से जबरन वसूली का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार, आरोपियों ने व्यापारी अब्दुल फहद से लगभग दो लाख रुपये नकद और 4500 यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) जबरन ट्रांसफर कराई। शिकायत सामने आते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई शुरू की और सबसे पहले सोहेल व नावेद को हिरासत में लिया गया।
जांच में सामने आई पुलिसकर्मियों की भूमिका
जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हुआ कि इस अपराध में दो आरक्षकों की भी संलिप्तता है। सबूत मिलने के बाद दोनों को आरोपी बनाकर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। बताया जा रहा है कि दोनों पर पहले भी अनुशासनहीनता और अन्य गंभीर आरोप लगे थे, जिस कारण वे पहले से विभाग की निगरानी में थे।
विभाग ने दिया सख्त संदेश
डीसीपी कुमार प्रतीक ने कहा कि पुलिस बल में अनुशासन सबसे अहम है और जो भी कर्मचारी कानून के खिलाफ जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। इस घटना के बाद भले ही पुलिस की छवि को आघात पहुंचा हो, लेकिन प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दोषियों को किसी भी स्थिति में संरक्षण नहीं मिलेगा।


