प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की मौजूदगी में भारत–जर्मनी के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि आतंकवाद मानवता के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक है और इसके खिलाफ भारत व जर्मनी मिलकर पूरी मजबूती से संघर्ष जारी रखेंगे।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार बेहद जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को लेकर G4 देशों के माध्यम से भारत और जर्मनी का साझा प्रयास इसी सोच को दर्शाता है। बातचीत के दौरान यूक्रेन और गाज़ा समेत कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है और इस दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के बीच गहरे भरोसे और समान दृष्टिकोण का प्रमाण है। रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए उन्होंने चांसलर मर्ज़ का आभार व्यक्त किया। साथ ही, रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर भी सहमति बनी, जिससे सह-विकास और सह-उत्पादन के नए रास्ते खुलेंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत और जर्मनी के बीच तकनीकी सहयोग हर साल मजबूत होता जा रहा है और इसका असर अब ज़मीनी स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी दोनों देशों की प्राथमिकताएं काफी हद तक समान हैं। उन्होंने कहा कि चांसलर मर्ज़ की यह यात्रा एक अहम समय पर हो रही है—पिछले साल भारत–जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हुए और इस वर्ष दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष मना रहे हैं। ये उपलब्धियां केवल समय की नहीं, बल्कि साझा लक्ष्यों, आपसी विश्वास और लगातार मजबूत होते सहयोग का प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि भारत और जर्मनी जैसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच घनिष्ठ सहयोग पूरी दुनिया के हित में है।


