धमाके की जांच में यूनिवर्सिटी लैब से कैमिकल गायब मिलने का दावा

दिल्ली धमाके की जांच आगे बढ़ने के साथ ही फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी भी सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है। शुरुआती पूछताछ में स्टाफ से मिले बयानों में कई मतभेद सामने आए हैं, जिससे अधिकारियों की शंकाएँ और गहरी हो गई हैं।
धमाके वाले दिन स्टाफ के गायब होने की जानकारी
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, धमाके के दिन और उसके बाद की रात कई डॉक्टरों व फैकल्टी सदस्यों के अचानक गायब या भूमिगत होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ लोग अपनी कक्षाएँ और ड्यूटी बीच में ही छोड़कर चले गए।
मोबाइल फोन व सोशल मीडिया बंद
कई संदिग्ध व्यक्तियों के मोबाइल फोन बंद मिले हैं और उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी अचानक डिएक्टिवेट हो गए। इससे एजेंसियों का शक और बढ़ गया है कि कहीं धमाके के बाद घबराहट में डिजिटल सबूतों को छुपाने की कोशिश तो नहीं की गई।
बैंक खातों और संचार की जांच
सूत्र बताते हैं कि कुछ लोगों के ऐसे बैंक खातों को फ्रीज़ किया गया है जिनमें ₹2 लाख से अधिक की लेन-देन गतिविधियाँ देखी गई थीं। कॉल रिकॉर्ड्स, चैट हिस्ट्री और फंड ट्रेल की जांच भी तेज़ कर दी गई है।
लैब से कैमिकल गायब मिलने का दावा
जांच में यह भी सामने आया है कि छात्रों के प्रोजेक्ट्स और मेडिकल प्रयोगों के नाम पर लैब से रसायन और ग्लासवेयर गायब पाए गए हैं। रिकॉर्ड से मिलान करने पर ऐमोनियम नाइट्रेट समेत कुछ केमिकल टेस्टिंग किट और उपकरणों की कमी पाई गई, जिनकी एंट्री भी रजिस्टर में दर्ज नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि लैब से सामान को छोटी-छोटी मात्रा में बैग या गाड़ियों में ले जाया जाता था, जिससे किसी को संदेह न हो।
एनआईए की पूछताछ जारी
गिरफ्तार व्यक्तियों से एनआईए यह समझने की कोशिश कर रही है कि लैब से कौन-कौन से रसायन कब लिए गए, उनका इस्तेमाल कैसे होना था और क्या किसी बाहरी समूह द्वारा इन्हें उपयोग करने के निर्देश दिए गए थे। विस्फोटक सामग्री तैयार करने में किन कैमिकल्स की कितनी मात्रा उपयोग की जा सकती है, इस पर भी पूछताछ जारी है।


