राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘सियावर रामचंद्र की जय’ के उद्घोष के साथ की। उन्होंने कहा कि अयोध्या की इस पवित्र धरती पर आकर वे भावनाओं से भर गए हैं और आज उन्हें जीवन का एक विशेष संतोष प्राप्त हुआ है। रक्षा मंत्री ने स्मरण कराया कि दो वर्ष पूर्व प्रभु श्रीराम लगभग 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए थे। उन्होंने कहा कि रामलला का यह मंदिर आने वाले हजारों वर्षों तक भगवान श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों का संदेश देता रहेगा।
उन्होंने राम मंदिर निर्माण को विश्व इतिहास के सबसे बड़े जन आंदोलनों में से एक बताया और कहा कि इससे बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन शायद ही दुनिया में कहीं और हुआ हो। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि आज भारत की पहचान और उसका ध्वज समुद्र पार भी ऊंचाइयों को छू रहा है, जबकि अयोध्या में धर्म और आस्था की पताका लहरा रही है।
उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ के नेतृत्व में अयोध्या के तेज़ी से हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि सोलर सिटी, आधुनिक रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ अयोध्या अब विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ी है। अपने विचारों को आगे बढ़ाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि धर्म, कर्तव्य, नीति और मर्यादा के साक्षात स्वरूप भगवान राम हैं। राम केवल धर्म के रक्षक ही नहीं, बल्कि धर्म का आचरण करने वाले भी हैं। उन्होंने कहा कि राम वह चेतना हैं जो मनुष्य को मानवीय मूल्यों से जोड़े रखती है और जहां अंतिम आशा भी समाप्त हो जाती है, वहां राम का मार्ग दिखाई देता है।


