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अमेरिका पर निर्भरता खत्म, फ्रांस से इंजन टेक्नोलॉजी ट्रांसफर

अब भारत में ही बनेंगे राफेल और उनके इंजन, फ्रांस से ऐतिहासिक डील

भारतीय वायुसेना के तेज़स लड़ाकू विमान कार्यक्रम को लंबे समय से अमेरिकी कंपनी जीई के इंजन सप्लाई में देरी का सामना करना पड़ रहा है। F-404 और F-414 इंजनों की सीमित आपूर्ति के कारण तेज़स Mk-1A और Mk-2 प्रोजेक्ट तय समय पर आगे नहीं बढ़ पा रहा, जिसकी वजह से 2025 तक पूरा होने वाला यह कार्यक्रम अब 2030 तक खिसकने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति से निकलने के लिए भारत अब फ्रांस के साथ एक ऐतिहासिक रक्षा साझेदारी की ओर बढ़ रहा है। प्रस्तावित समझौते के तहत भारत में ही राफेल लड़ाकू विमान और उनके M88 इंजन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें पूरी ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) शामिल होगी।

फ्रांस देगा पूर्ण तकनीकी सहयोग

राफेल बनाने वाली कंपनी डसॉल्ट एविएशन और इंजन निर्माता सैफ्रान भारत में प्रोडक्शन लाइन लगाने को तैयार हैं। इस योजना में:

  • M88 इंजन की असेंबली लाइन भारत में लगेगी
  • आगे चलकर इंजन के कंपोनेंट्स का निर्माण भी देश में होगा
  • टाटा, एलएंडटी और अडानी जैसे निजी समूहों की भागीदारी की संभावना
  • अगले 5 साल में उत्पादन व्यवस्था शुरू करने का लक्ष्य
  • 2035 तक पूर्ण उत्पादन क्षमता हासिल करने की योजना

राफेल की दुनिया में बढ़ती मांग

राफेल विमान की अंतरराष्ट्रीय मांग तेज़ी से बढ़ रही है। अक्टूबर 2024 तक डसॉल्ट ने अपना 300वां राफेल जेट तैयार कर लिया है।
फ्रांस और अन्य देशों के साथ मिलाकर कंपनी के पास इस समय लगभग 533 विमानों के ऑर्डर हैं, जिनमें भारत, मिस्र, कतर, ग्रीस, क्रोएशिया, यूएई, सर्बिया और इंडोनेशिया शामिल हैं। हाल ही में फ्रांस और यूक्रेन के बीच समझौता हुआ है, जिसके तहत अगले 10 सालों में यूक्रेन को 100 राफेल फाइटर जेट मिलेंगे।

भारत 114 राफेल खरीदने की तैयारी में

भारतीय वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय को 114 नए राफेल जेट खरीदने का प्रस्ताव भेज दिया है, हालांकि अंतिम सौदे पर अभी मुहर लगनी बाकी है। इसके अलावा रूस से पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन खरीदने को लेकर बातचीत चल रही है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹10,000 करोड़ बताई जा रही है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के अगले महीने भारत आगमन के दौरान इस सौदे पर फैसला हो सकता है।

हैमर मिसाइल और इंजन MRO हब

राफेल से दागी जाने वाली हैमर मिसाइल ने “ऑपरेशन सिंदूर” में शानदार प्रदर्शन किया था। अब सैफ्रान इस मिसाइल के निर्माण में भी भारत के साथ साझेदारी के लिए तैयार है। यही नहीं, हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी CFM LEAP और M88 इंजन की MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर, ओवरहॉल) फैसिलिटी शुरू होने जा रही है, जिसमें 240 मिलियन यूरो का निवेश किया जाएगा। इससे राफेल इंजनों की सर्विसिंग अब देश में ही होगी।

आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान

अमेरिका पर इंजन निर्भरता के कारण जिस तेज़स परियोजना को लगातार झटके लग रहे थे, अब फ्रांस के सहयोग से भारत एयरक्राफ्ट इंजन निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहा है। यह पहल न सिर्फ भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगी, बल्कि देश को वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब बनाने की दिशा में भी अहम साबित होगी।

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