अमेरिका ने वैश्विक राजनीति और कूटनीति में एक बड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से किनारा कर लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक आधिकारिक राष्ट्रपति ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अमेरिका को कुल 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, समझौतों और मंचों से बाहर निकालने का आदेश दिया है। इस फैसले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें भारत और फ्रांस द्वारा संचालित अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) भी शामिल है। व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ये संस्थाएं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं हैं। इस निर्णय के तहत 35 ऐसे संगठन हैं जो संयुक्त राष्ट्र से सीधे जुड़े नहीं हैं, जबकि 31 संस्थाएं यूएन प्रणाली का हिस्सा हैं।
जलवायु और ऊर्जा सहयोग को बड़ा झटका
जिन गैर-यूएन संगठनों से अमेरिका ने दूरी बनाई है, उनमें पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कई वैश्विक मंच शामिल हैं। इनमें इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA), IUCN, IPCC, IRENA और इंटरनेशनल एनर्जी फोरम जैसे प्रभावशाली संगठन शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संस्थाओं से अमेरिका के हटने से वैश्विक स्तर पर जलवायु कार्रवाई और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संस्थानों पर भी असर
अमेरिकी फैसले का प्रभाव संयुक्त राष्ट्र से संबंधित कई अहम निकायों पर भी पड़ा है। जिन यूएन संस्थाओं से अमेरिका ने हटने का फैसला किया है, उनमें डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स, इंटरनेशनल लॉ कमीशन, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, पीसबिल्डिंग कमीशन, यूएन पॉपुलेशन फंड (UNFPA), यूएन वाटर और यूएन एनर्जी शामिल हैं। इन संस्थाओं में अमेरिकी भागीदारी और वित्तीय सहयोग रुकने से विकास परियोजनाओं, शांति प्रयासों और सामाजिक कार्यक्रमों पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
तुरंत अमल के निर्देश
राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी अमेरिकी मंत्रालयों और एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे इन संगठनों से तत्काल प्रभाव से अमेरिका की भागीदारी और फंडिंग समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू करें। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े मामलों में यह कदम कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उठाया जाएगा। ज्ञापन के अनुसार, विदेश मंत्री की रिपोर्ट और कैबिनेट से सलाह के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि इन संस्थाओं में अमेरिका की मौजूदगी देश के हितों के खिलाफ है।
पहले भी ले चुका है ऐसा रुख
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी बनाई हो। इससे पहले जनवरी 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और जुलाई 2025 में यूनेस्को (UNESCO) से अमेरिका के बाहर निकलने की घोषणा की गई थी। तब भी प्रशासन ने यही तर्क दिया था कि ये संस्थाएं अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को पर्याप्त रूप से आगे नहीं बढ़ा रहीं।


